हम मजबूर हैं
हम मजबूर हैं

😠 हम मजबूर हैं  😠

साहब! हम मजदूर हैं
इसीलिए तो मजबूर हैं
सिर पर बोझा रख कर
खाली पेट,पानी पीकर
हजारों मील घर से दूर
गोद में बच्चों को लेकर
अनजान राहों पर चलने को।

🐾

बेबस हैं हम,लाचार हैं हम
आए थे काम की तलाश में
पर,इस #Lockdown में
न घर के रहे,न बाहर के
बीच में फ़ँस कर रह गए
पैदल ही चलना पड़ा
सोच कर एक दिन
पहुंच ही जाएंगे अपने घर।।

🐾

लम्बा है रस्ता, चलते जाना है
अपने बच्चों की खातिर
भूखे-प्यासे और बदहाल
सो जाते हैं थक कर
रेल की पटरी या फुटपाथ
या सड़क के किनारे पर
बेसुध होकर।

🐾

लेखक :सन्दीप चौबारा
( फतेहाबाद)

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