गीत लिखे हजार मगर
गीत लिखे हजार मगर

गीत लिखे हजार मगर

🌼

गीत लिखे हजार मगर गाया ना जा सके

दर्द मिले ऐसे की बताया ना जा सके

🌼

इस ज़ुबानी फ़र्क़ की इम्तेहान में

खुद को बचाया ना जा सके

🌼

लिखा है कुछ तो मगर क्या

लिखे येसे की जनाया ना जा सके

🌼

शोर इतना हो चूका था

चाहकर भी छुपाया ना जा सके

🌼

मेरे नाम के आगे ‘शायर’ मत लिखना

इन् हाथों से हो सकता है मिटाया ना जा सके

🌼

अदब की दुनिया में काला निसान है ‘अनंत’

क़ाबिल-ए-नफरत के सिवा कुछ कमाया ना जा सके

 

🌼

शायर: स्वामी ध्यान अनंता

 

यह भी पढ़ें : दयार-ए-इश्क़ से डर गए हम भी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here