Desh bhakti ki kavita
Desh bhakti ki kavita

बोलो वन्दे मातरम्!

( Bolo vande mataram )

 

कितनी मासूमियत इस मिट्टी में,
बोलो वन्देमातरम्!
सोंधी-सोंधी खुशबू उठती,
बोलो वन्देमातरम्!

बाग-बगीचे मुस्काते इसके,
बोलो वन्देमातरम्!
नृत्य करती सागर की लहरें,
बोलो वन्देमातरम्!

झूम-झूमकर गाती नदियाँ,
बोलो वन्देमातरम्!
ऊँची -ऊँची पर्वत मालाएँ,
बोलो वन्देमातरम्!

चादर बिछी है हरियाली की,
बोलो वन्देमातरम्!
बासंती हवा की मस्ती चढ़ती,
बोलो वन्देमातरम्!

ईद,दिवाली,क्रिसमस,होली,
बोलो वन्देमातरम्!
एक रंग में सब रंग जाते,
बोलो वन्देमातरम्!

खेत-खलिहान फसल से सजते,
बोलो वन्देमातरम्!
एक साथ हम मिलके रहते,
बोलो वन्देमातरम्!

गीता-कुरान के छाँव में पलते,
बोलो वन्देमातरम्!
कुदरत की सौगात बरसती,
बोलो वन्देमातरम्!

डाल-डाल पे पंछी चहकते,
बोलो वन्देमातरम्!
इस मिट्टी से जुड़ी भावना,
बोलो वन्देमातरम्!

प्राणों से भी प्यारा तिरंगा,
बोलो वन्देमातरम्!
आजादी की कोख से निकला,
बोलो वन्देमातरम्!

नदियों खून बहाया हमने,
बोलो वन्देमातरम्!
तब जाकर आजादी पाया,
बोलो वन्देमातरम्!

नभ इससे है शोभा पाता,
बोलो वन्देमातरम्!
तिरंगा हमारे देश की धड़कन,
बोलो वन्देमातरम्!

इसकी शान अमर रहेगी,
बोलो वन्देमातरम्!
रखता है सर देश का ऊँचा,
बोलो वन्देमातरम्!

तीन रंग से सजा तिरंगा,
बोलो वन्देमातरम्!
शक्ति,शांति,प्रगति का द्योतक,
बोलो वन्देमातरम्!

देशभक्ति की ज्योति जलाता,
बोलो वन्देमातरम्!
रुके नहीं विकास का पहिया,
बोलो वन्देमातरम्!

शत्रु काँपता इसे देखकर,
बोलो वन्देमातरम्!
महाशक्ति ये देश बनें,
बोलो वन्देमातरम्!

सारे जहां से अच्छा भारत,
बोलो वन्देमातरम।
मिट जाएँगे देश की खातिर,
बोलो वन्देमातरम।

राणा, शिवा, भगत की जय,
बोलो वन्देमातरम।
अमर रहें अशफाकउल्ला,
बोलो वन्देमातरम।

जान हथेली पे हम रखते,
बोलो वन्देमातरम।
उफ़ तक जुबां नहीं बोलेगी,
बोलो वन्देमातरम।

नहीं टूटेगी बलिदान की परंपरा,
बोलो वन्देमातरम।
थाल भाल से सजा रहेगा,
बोलो वंदेमातरम।

?

कवि,साहित्यकार : रामकेश एम.यादव

मुंबई

( महाराष्ट्र )

यह भी पढ़ें :- 

शांतिदूत | Poem shantidoot

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here