Desh prem kavita
है हंसी कितना ये वतन मेरा

है हंसी कितना ये वतन मेरा

( Hai hasi kitna ye watan mera )

 

 

है हंसी कितना ये वतन मेरा

फ़ूलों से ये खिले चमन मेरा

 

है ख़्वाहिश दिल की मेरी ये यारों

काम वतन के आऐ बदन मेरा

 

ये है तो चैन से सोते घर में

हर सैनिक को दिल से नमन मेरा

 

नफ़रत की ख़त्म हो बू हर दिल से

देश हो प्यार का  अमन मेरा

 

हर किसी में उल्फ़त महकाये

एकता से बंधा  वतन मेरा

 

आंच आने न दो वतन पे ही

है बस आज़म यही कहन मेरा

 

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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