हुंकार
हुंकार

हुंकार

( Hunkaar )

 

चढ़ गई प्रत्यंचा अब युद्ध की टंकार सुनो

हुआ रणभूमि में शंखनाद अब मेरी

हुंकार सुनो

रंग मस्ती का उबल रहा है

लहू बन कर रग रग में

चला हूं देश हित में कुछ कर दिखाने को सुनो

बांध सर पे कफ़न लिये दिल में वतन

छाती में दुश्मन के तिरंगा फहराने को सुनो

चीर के रख देना है शत्रु का सीना अब दो फाड़ हो जाने दो

मौज है मतवालों की आजादी की ललकार सुनो

रक्त रंजित चीखों में यहां दीवाने हंसते हैं

समर धरा पे मातृभूमि की रक्षा खातिर क्षण क्षण में परवाने

सूली चढ़ते हैं

है जुनून दिल में देश सेवा का अरमान मिलेगा

चीर के देख लो सीना मेरा

केवल हिंदुस्तान मिलेगा

🌸

कवि : राजेश गोसाईं

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