छूना है आसमां को

 जमीन पर पैर रखकर ।

 जाना है बुलंदियों पे,

 नीव जमी से बना कर ।

 उड़ना है आसमां में,

जुनून के पंख और

 जज्बे की उड़ान के साथ

ना थकना है, ना रुकना है,

 ना टूटना है, ना झुकना है ।

अब बस आगे बढ़ना है !

पाना है मंजिल को,

 जीना है ख्वाबों को,

छूना है आसमान को ।।

लेखिका : अर्चना

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