लक्ष्य का संधान कर
लक्ष्य का संधान कर

लक्ष्य का संधान कर

( Lakshya ka sandhan kar )

 

अटल इरादे उर में भरकर
आशा और विश्वास धरकर
संघर्षों  में  पलना  होगा
तूफानों  में  चलना  होगा

 

विकट समय की चुनौतियों का
मानव जरा अनुमान कर
मानवता की खातिर बढ़कर
नर लक्ष्य का संधान कर

 

यज्ञ हवन आहुति कर दो
घट घट आस्था प्रेम भरी दो
सद्भावों का लहरा परचम
घर घर में खुशहाली कर दो

 

वक्त को नया मोड़ देने को
अपनापन का भान कर
भाईचारा घर-घर फैलाकर
नर लक्ष्य का संधान कर

 

बीमारी महामारी फैली
महंगाई लाचारी फैली
भ्रष्टाचारी भारी फैली
आतंक की खुमारी फैली

 

कोहराम मिटाने जग का
जन मन में हौसला भर
जीवन की जंग जीतने को
नर लक्ष्य का संधान कर

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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