Motivational poem in Hindi
Motivational poem in Hindi

वक्त तुमने मुझे यूँ झुका तो लिया

( Waqt tumne mujhe yun jhuka to liya )

 

 

वक्त तुमने मुझे यूँ झुका तो लिया,

हौसलों को मेरे न डिगा पाओगे।।

पंख काटे हैं तुमने बेशक मेरे,

पर गगन को न मुझसे बचा पाओगे।।

 

मैं हूँ चंचल सा जल, रुक न पाऊँ कहीं

कैसे कह दूँ कि मंजिल को पाऊँ नहीं

मैं गिरूँगा तेरी ठोकरों से मगर,

सोचना मत कि उठ न पाऊँ कहीं

 

चाहे काँटे लगा लो चाहुँओर तुम,

फूल खुशियाँ मेरी न छुपा पाओगे।

वक्त तुमने मुझे यूँ झुका तो लिया,

 हौसलों को मेरे न डिगा पाओगे।।

 

आज मीठे हो तुम,और खारा हूँ मैं

है अंधेरा बहुत, बेसहारा हूँ मैं

अपने रण की तो ये, शुरूआत है

तुम न जीते अभी, न ही हारा हूँ मैं

 

तुमने छिनी है मुझसे महफ़िल भले,

गीत मेरे न मुझसे चुरा पाओगे।

वक्त तुमने मुझे यूँ झुका तो लिया,

 हौसलों को मेरे न डिगा पाओगे।।

🌸

कवि भोले प्रसाद नेमा “चंचल”
हर्रई,  छिंदवाड़ा
( मध्य प्रदेश )

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