मुल्क अपना अमन चाहता है 
मुल्क अपना अमन चाहता है 

मुल्क अपना अमन चाहता है 

( Mulk Apna Aman Chahta Hai )

 

 

मुल्क अपना अमन चाहता है

सुगंधित पुष्प महकना चाहता है

 

तेजाब से न सीचों क्यारियों को

ये मुल्क अब महकना चाहता है

 

कसूर पुष्पों का नहीं कीड़ों का है

बीमार मुल्क इलाज दवा चाहता है

 

मुल्क अपना अमन चाहता है

सुगंधित पुष्प महकना चाहता है

 

आजाद परिंदे है जबरन से कैद यहां

 अब ये परिंदे आजाद उड़ना चाहता हैं

 

नफरत से जबरन बीज ना उगाओ तुम

अब ये खेत लह लहराना चाहता हैं

 

हुकूमत में कानून तो जायज है

पर मुल्क हिफाजत रोटी चाहता है,

 

सबका जीवन हवा सूर्य पानी है

पर ये मुल्क बेचना नहीं चाहता है

 

रात की चांदनी अंधेरी रोशनी है

ये मुल्क रोशनी रोशनी चाहता है

 

अब मुल्क अपना अमन चाहता है

सुगंधित पुष्प महकना चाहता है।

 

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Dheerendra

लेखक– धीरेंद्र सिंह नागा

(ग्राम -जवई,  पोस्ट-तिल्हापुर, जिला- कौशांबी )

उत्तर प्रदेश : Pin-212218

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