राष्ट्र पुत्र
राष्ट्र पुत्र

राष्ट्र पुत्र

( Rastra Putra )

राष्ट्रपुत्र वीर तुम

राष्ट्र का निर्माण हो

राष्ट्र की अखंडता में

प्रबल तुम प्रमाण हो

राष्ट्र के स्वाभिमान में

सर्व शक्ति मान हो

राष्ट्र की जान के लिए

राष्ट्र की जान हो

राष्ट्र पुत्र वीर तुम

राष्ट्र का अभिमान हो

काल के कपाल पर

लहू को उबालकर

शत्रु की चाल पर

निगाह दूर डाल कर

शत्रु के समक्ष भाल कर

हुंकार कर ललकार कर

शत्रु के वक्ष पर

अस्त्र-शस्त्र रखकर

शौर्य शक्तिपुंज का संचार कर

शत्रु की डगर पर

रूको नहीं झुको नहीं

ठान लो तो शत्रु का

काम सब तमाम हो

अजर बनो अमर बनो

प्राण लो तो प्राण का भी दान दो

राष्ट्र पुत्र वीर तुम

राष्ट्र का अभिमान हो

जहां चलो शत्रु के

नगर में भूचाल हो

दुश्मनों के शीश पर

चढ़ चलो बढ़ चलो

एक हाथ तिरंगा

दूजे में मशाल लो

राष्ट्र की आन बान में

राष्ट्र की शान हो

विश्व के अटल पटल पे

राष्ट्र का ही नाम हो

पृष्ठ पृष्ठ पर स्वर्णिम

अक्षर का विश्राम हो

विश्व के मानचित्र पर

अखंड हिंदुस्तान हो

राष्ट्र पुत्र वीर तुम

राष्ट्र का अभिमान हो

प्रहार कर संहार कर

चीन पाकिस्तान पर

नये युग निर्माण में

हिंद का जयगान कर

वंदे मातरम बोल

खेल फिर जान पर

धरती अम्बर में

राष्ट्र का यशगान कर

मुख में जयघोष

संग विजय का निशान हो

आये धरा पे संकट

तो हिंद का तुफान हो

राष्ट्र पुत्र वीर तुम

राष्ट्र का अभिमान हो

 

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कवि : राजेश गोसाईं

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