ऐसा जहां में देखो हुस्ने शबाब उतरा

ऐसा जहां में देखो हुस्ने शबाब उतरा   ऐसा जहां में देखो हुस्ने शबाब उतरा जैसे जमीं पे ए यारों आफ़ताब उतरा   जिसकी महक ने ही दीवाना बना दिया है दिल में मगर ऐसा वो मेरे गुलाब उतरा   उल्फ़त फ़ना दिलों से अब हो गयी यहां तो दिल में ही नफ़रतों का ऐसा … ऐसा जहां में देखो हुस्ने शबाब उतरा को पढ़ना जारी रखें