अमरेश सिंह भदौरिया की कविताएं | Amresh Singh Bhadauriya Poetry
अमलतास चुपचाप झरता है अमलतास,जैसे पीली चूड़ियाँगिर रही हों किसी दुल्हन की कलाई से। गाँव की पगडंडी परजब धूप भी सो रही होती है,तब वहरंग भरता है उदासी में। न फूलों का शोर,न ख़ुशबू का घमंड—बस पीली परतों मेंएक ऋतु की मुस्कान ओढ़ेवह खड़ा रहता है। लड़कियाँ उसके नीचेखेल जाती हैं ब्याह-बनाव की कल्पनाएँ,बुजुर्ग उसकी … Continue reading अमरेश सिंह भदौरिया की कविताएं | Amresh Singh Bhadauriya Poetry
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