अपने सजन पर रहे बोझ बाक़ी न इतना भी मन पर रहेकुछ भरोसा तो अपने सजन पर रहे राहे- मंज़िल थी काँटो भरी इस कदरदाग़ कितने दिनों तक बदन पर रहे आज जी भर के साक़ी पिला दे हमेंमुद्दतों से ही हम आचमन पर रहे कह रहे हैं ग़ज़ल हम तो अपनी मगरवोही छाये हमारी … Continue reading अपने सजन पर रहे
Copy and paste this URL into your WordPress site to embed
Copy and paste this code into your site to embed