अति

“अति” प्रत्येक अति बुराई का रूप धारण कर लेती है।उचित की अति अनुचित हो जाती है।। अति मीठे को कीड़ा खा जाता है।अति स्नेह मति खराब कर देता है।। अति मेल मिलाप से अवज्ञा होने लगती है।बहुत तेज हवा से आग भड़क उठती है।। कानून का अति प्रयोग अत्याचार को जन्म देता हैं।अमृत की अति … Continue reading अति