चातुर्मास अस्तित्व का एक सूक्ष्म विराम

चातुर्मास — केवल पंचांग के चार मास नहीं, बल्कि मानवीय चेतना के गहरे आरोहण का एक सनातन सूत्र है। यह मात्र एक धार्मिक अवधि नहीं, अपितु जीवन के विराट चक्र में आत्म-अन्वेषण और पुनर्संयोजन का एक दार्शनिक पड़ाव है। आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से कार्तिक की प्रबोधिनी एकादशी तक फैला यह काल, समय के प्रवाह … Continue reading चातुर्मास अस्तित्व का एक सूक्ष्म विराम