चोरी कर के लिखता हूँ मैं क्या लूटा है मैंने बतला, झूठे क़िस्से गढ़ा ना करजन्मजात दौलत वाला हूँ, तौहमत यूँ ही मढ़ा ना कर भूखा-नंगा था ये कह कर, मियां बेइज्जती करता क्योंतू भी रंग जा मेरे रँग में, तिल का ताड़ बड़ा ना कर पहले ही से मैं बेचारा, मुश्किलात में घिरा हुआज़ख़्मों … Continue reading चोरी कर के लिखता हूँ मैं
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