ढाट इतिहास

ढाट इतिहास ढाट का ढंग निराला मन भावन पावन,ढाट का रंग निराला चित्त चित्र पावन। खावड़ में खोदते ख़ूब पार खेतों में ,मीठा मन भावन धोरा धरती रेतों में। झाड़ जंगल पहाड़ नहीं आकड़े उगते अपार,बूहड़ा फोग सिणिया खीप खड़े कर क़त़ार। मनख महमानों की करते मान मनोहार मोकली,जीमण को रोटी राबड़ी झण मखण ढोकली। … Continue reading ढाट इतिहास