डॉ. कामिनी व्यास रावल की ग़ज़लें | Dr. Kamini Vyas Poetry

छंद-मनहरण घनाक्षरी कण्ठ शोभे सर्प माला ,शिव  पिये  विष प्यालाबेल पत्र अति प्रियत्रिशूल वो धारी है । सोम शिव  सिर सोहे, संग गंगा मन मोहेडमरू लिए हाथ मेंनंदी की सवारी है। शिव पूजे वर मिले , शिव कृपा सृष्टि चले धन धान भर देतेभोला वो भंडारी है । हर पीड़ा हर हरे , हर काम हर … Continue reading डॉ. कामिनी व्यास रावल की ग़ज़लें | Dr. Kamini Vyas Poetry