डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ की कविताएं | Dr. Pallavi Singh ‘Anumeha’ Poetry
सच्चा प्रतिवाद तुम्हारे बेतरतीब बरताव सेमैं अभिप्रहत हुई…किन्तु रोई नहीन ही मैं चिल्लाईऔर न ही मैंने तुम्हें पुकारान कोई आरोप लगाया ….बस शनै:-शनै: तुम्हारी जिंदगी सेपृथक कर लियानिर्वाक रुखसत हो ली।तुमने कदाचित,सोचा कि फतहहासिल कर ली मुझसे…..लेकिन कालांतर मेंये मौनतुम्हारी अंतरात्मा के ड्योढ़ी परआहट देगातुम बचना भी चाहो इससेलेकिन यह मौन रुकेगा नही…क्योंकि सच्चा प्रतिवादकभी … Continue reading डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ की कविताएं | Dr. Pallavi Singh ‘Anumeha’ Poetry
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