जीने के लिए सोचा ही नही दर्द सम्भालने होंगे

वृद्धाश्रम में मेरी बेटी ने महसूस किए जीवन के नाशुक्रे लम्हे आज मेरी बेटी कु. गुड़िया विजय तोरावत जैन ने अपने स्कूली सहपाठियों के साथ अकोला के वृद्धाश्रम को भेंट दे कर निराधर.. बेघर.. अपनो के हाथों लुटे गए.. कुचले गए, बुजुर्गों को थोड़े समय के लिए ही सही मगर दुनिया भर की खुशिया दी। … Continue reading जीने के लिए सोचा ही नही दर्द सम्भालने होंगे