झूले पड़ गए सावन के | Jhule pad gaye sawan ke

झूले पड़ गए सावन के ( Jhule pad gaye sawan ke )   आजा साजन आजा साजन झूले पड़ गये सावन के उमड़ घुमड़ बदरिया छाई बूंदे बरसे मोती बनके   इठलाती बलखाती सी नदियां लहर लहर लहराये सुरभीत बाग बगीचे महके तन मन सारा हरसाये   हरियाली से भरी वादियां फूल खिले मनभावन से … झूले पड़ गए सावन के | Jhule pad gaye sawan ke को पढ़ना जारी रखें