कागा के खट्टे मीठे अनुभव

राम नाम राम मेरे रोम रोम में बसता,राम मेरे सांस रोमांस में बसता! आंखों का तारा बन हर पल,राम मेरी नज़र नूर में बसता! रक्त धारा बहती रग रग में,लाल ध्वल नस नस में बसता! राम रंग रूप स्वरूप मन मूर्त,स़ूरत बन सलोनी तन में बसता ! मृग नाभि कस्तूरी ढूंढे वन उपवन,सूंघे घास सुगंध … Continue reading कागा के खट्टे मीठे अनुभव