कर रहा मनुहार है

कर रहा मनुहार है क्यों अकारण कर रहा मनुहार हैबात तेरी हर मुझे स्वीकार है मेरे होंठो पर तुम्हारी उंगलियाँमैं समझता हूँ यही तो प्यार है तेरा यह कहना तुम्हें मेरी क़सममुझ अकिंचन को यही उपहार है बात तेरी मान तो लूँ मैं मगरसामने मेरे अभी संसार है दे दिया जीने का मुझको रास्तातेरा यह … Continue reading कर रहा मनुहार है