सुनो दिकु | Kavita Suno Diku

कभी ना कभी कभी ना कभी तो लौटोगी तुम,इन सूनी राहों पर चलती हुई,जहाँ हर मोड़ पे तेरा नाम लिखा हुआ है,आवाज़ है मेरी खामोशी में पलती हुई। कभी ना कभी तो समझोगी तुम,इन अधूरे अल्फ़ाज़ों की पीर,जो हर रोज़ तुझसे मिलने को,तकिये के नीचे सोता हैं चुपचाप रखकर अपना सिर। कभी ना कभी तो … Continue reading सुनो दिकु | Kavita Suno Diku