खोया है विश्वास

खोया है विश्वास : नवगीत फटे-पुराने कपड़े उनके,धूमिल उनकी आस।जीवन कुंठित है अभाव में,खोया है विश्वास।। अवसादों की बहुतायत है,रूठा है शृंगार।अंग-अंग में काँटे चुभते,तन-मन पर अंगार।।मन विचलित है तप्त धरा है,कौन बुझाये प्यास। चीर रही उर पिक की वाणी,काॅंपे कोमल गात।रोटी कपड़ा मिलना मुश्किल,अटल यही बस बात।।साधन बिन मौन हुआ उर,करें लोग परिहास। आग … Continue reading खोया है विश्वास