महाकुम्भ में खिचड़ी

महाकुम्भ में खिचड़ी धनु को त्याग मकर में आये,जब दिनकर भगवान।दक्षिण वलित हो गई धरती,आया पावन पर्व महान। हुई अवस्थिति अयन उत्तरी,अब शुभ मंगल दिन आये।वर को वधू, वधू को वर अब,हर्षित मन को मिल पायें। अलग अलग क्षेत्रों में लोहरी,पोंगल, बिहू, टुसू, संक्रांति।उत्तरायण से ही जन-जन में,क्रमशः भरती जाती कान्ति। मिलती मुक्ति शीत से … Continue reading महाकुम्भ में खिचड़ी