मैं चुप हूं ( Main Chup hoon ) मेरे पास शब्दों की माला है पास मेरे संस्कारों की थाती है जानती हूं ,अच्छाई और बुराई के भेद मेरी कलम ने सिखाया है मुझे न करें मुझे बेचारी और बेबस समझने की भूल…. मैं चुप हूं ,तो महज इसलिए की मेरे संस्कार इसकी गवाही नहीं … Continue reading मैं चुप हूं | Main Chup hoon
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