मैं सोचता रहा

मैं सोचता रहा मैं सोचता रहा उसे जिस पल ग़ज़ल हुईफिर सर से पांव तक ये मुसलसल ग़ज़ल हुई कुछ तो नशा भी चाहिए था काटने को जीस्तऔर ऐक दिन मेरे लिए बोतल ग़ज़ल हुई भड़की है आग बन के जिगर में कहीं,कहींदिलबर के गोरे पांव की पायल ग़ज़ल हुई हफ़्तों कलम उठा न रक़म … Continue reading मैं सोचता रहा