मन

मन बहुत शक्तिशाली हैव्यापक हैउसका साम्राज्यउसकोचुनौती देने वालाकोई नहीं हैअतः भलाई हैप्रकृति के नियम केसाथ चलने में हीसार नहींविपरीत दिशा में कोईमन में कालुष्य न आयेकर्म काट करइतना हिम बनकरचले कि खुद केसंगति वह जो नीति सिखायेवैराट्य प्रकट होवाणी में वैर-भावन उगने पायेराग- द्वेष से दूरहो जायें औरध्रुवतारा -सी चमकलिए सारे जगत मेंचमक सही सेआत्मा … Continue reading मन