मेरे दिल की बस्ती

मेरे दिल की बस्ती मेरे दिल की बस्ती क्यों इतनी है सस्तीन कोई हलचल न कोई मस्तीलोग आकर चले जाते हैंनहीं रुकती कोई हस्ती।। मैं भी सोचता हूं कोई आकर गुलज़ार करेंथोड़ा रुक कर यहां इंतजार करेंकुछ बहार लाए जिन्दगी मेंहमसे भी कोई प्यार करें।। जिंदगी का मेरे कोई थोड़ा किनारा बनेसाथ साथ चलने का … Continue reading मेरे दिल की बस्ती