मिरे पास ग़म के तराने बहुत है

मिरे पास ग़म के तराने बहुत है गुल-ए-दर्द के से ख़ज़ाने बहुत हैं।मिरे पास ग़म के तराने बहुत है। न हो पाएगा तुम से इनका मुदावा।मिरे ज़ख़्मे-ख़न्दां पुराने बहुत हैं। जो आना है तो आ ही जाओगे वरना।न आने के दिलबर बहाने बहुत हैं। कहां तक छुपाऊं में चेहरे को अपने।तिरे शहर में जाम-ख़ाने बहुत … Continue reading मिरे पास ग़म के तराने बहुत है