निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम

निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम,2024, खत लिखना चाहती हूं मैं तुम्हें।जीवन की उपलब्धियों में संगी बनाना चाहती हूं,कभी हौसलों को परखते रहे,कभी चलने का साहस बढ़ाते रहे। तुम ने एकांत के एहसासों को कोमलता से जगाया,अनुभवों की यात्रा में नयन सजल हुए जब,तुमने ही … Continue reading निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम