वतन के लिए | Pome in Hindi on Watan

वतन के लिए ( Watan ke Liye ) सर भी झुकते हैं लाखों नमन के लिए जान देते हैं जो भी वतन के लिए सिर्फ़ नारों से क्या होगा ऐ दोस्तो रौनक़े बख़्श दो अंजुमन के लिए मेरे बच्चों से उनकी ख़ुशी छीन ली और क्या चाहिए राहज़न के लिए पीठ पर गोलियाँ तुम न … Continue reading वतन के लिए | Pome in Hindi on Watan