रो दिये | Sad Ghazal in Hindi

रो दिये ( Ro Diye)   जो हमारी जान था जिसपे फ़िदा ये दिल हुआ जब हुआ वो ग़ैर का सब कुछ लुटाकर रो दिये। है अकड़ किस बात की ये तो ज़रा बतलाइये वक्त के आगे यहां रुस्तम सिकंदर रो दिये। फख़्र था मुझको बहुत उनकी मुहब्बत पर मगर जब घुसाया पीठ में इस … Continue reading रो दिये | Sad Ghazal in Hindi