सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़ की ग़ज़लें | Sarfraz Husain Faraz Poetry

नज़्में कहा करूं न मैं ग़ज़लें कहा करूं नज़्में कहा करूं न मैं ग़ज़लें कहा करूं।वो चाहते हैं उन पे क़स़ीदे पढ़ा करूं। उन पर कहां ये ज़ोर वो मेरी सुनें कभी।मुझको ये ह़ुक्म है के मैं उनकी सुना करूं। आंखों की आर्ज़ू है के देखूं जहांन को।दिल चाहता है उनके ही दर पर रहा … Continue reading सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़ की ग़ज़लें | Sarfraz Husain Faraz Poetry