सुमंगला सुमन की ग़ज़लें | Sumangla Suman Poetry
न कोई सफ़र, न किनारा मिला न कोई सफ़र, न किनारा मिलाहमें डूबने का इशारा मिला हवा साथ थी, फिर भी ठहरे रहेमुहब्बत में ना कुछ सहारा मिला कभी ख़्वाब लहरों पे लिखते रहेलिखा जो नहीं था, दुबारा मिला हमें ख़ार समझा था फूलों ने जबफ़िज़ा से वही फिर इशारा मिला भटकती रही कश्ती दरिया … Continue reading सुमंगला सुमन की ग़ज़लें | Sumangla Suman Poetry
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