Tag: Abhiman par Kavita
अभिमान | Abhiman par Kavita
मत करना अभिमान ( Mat karna abhiman ) चाहें कितना कोई हो बलवान, या कितना ही हो कोई धनवान। अथवा कितना कोई हो बुद्धिमान, अरे बन्दे तुम मत करना अभिमान।। अभिमान से होता है सर्वनाश, रुक जाता फिर उसका विकास। चाहें राजा रंक अथवा हो इन्सान, जिसने किया उसका हुआ विनाश।। सुंदरता पे न…