Tag: Khwab mein aakar sataye khoob koi

  • Ghazal | ख़्वाब में आकर सताये ख़ूब कोई

    ख़्वाब में आकर सताये ख़ूब कोई ( Khwab mein aakar sataye khoob koi )     ख़्वाब  में  आकर  सताये  ख़ूब  कोई नीद  से  इतना  जगाये  ख़ूब  कोई   नफ़रत की सुनली जुबां मैंनें बहुत है गीत उल्फ़त के  सुनाये  ख़ूब कोई   प्यासा हूँ मैं तो मुहब्बत का बरसो से प्यास उल्फ़त की बुझाये…