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  • कच्चे मकान बरसाती रातें | Poem kache makan

    कच्चे मकान बरसाती रातें ( Kache makan barsati raatein )   चलो कच्चे मकानों में, गरीबों के ठिकानों में। बरसाती राते देखो, उनकी जिंदगानी है।   छप्पर टपके पानी, नैन टपकता नीर। जलमग्न हो कुटिया, भरे बस्ती में पानी है।   दिल पर कैसी गुजरे, बरसाती काली रातें। अंधियारा घट छाए, बस्तियों की कहानी है।…