Tag: Poem Kai Uljhane hai Suljhane ko

  • कई उलझने हैं सुलझाने को | Poem Kai Uljhane hai Suljhane ko

    कई उलझने हैं सुलझाने को ( Kai uljhane hai suljhane ko )    नये रास्ते हैं आगे बढ़ जानेको सुंदर नजारे दिल मे समानेको नजर उठती है ठहर जाने को बेखौफ नदी जैसे बहजाने को रंजो गम को दबा जाने को महफूज जगह रुक जाने को बेपनाह मोहब्बत पा जाने को नैनों में ख्वाब सजा…