Tag: Prernadayak poem
सुंदर सोचें, सुंदर बने | Prernadayak kavita
सुंदर सोचें, सुंदर बने ( Sundar sochen, sundar bane ) सुंदर सोचें सुंदर बने, आओ करें विचार। दो दिन का है पाहुना, नश्वर यह संसार ।। देवालय सा तन है तेरा, सुंदर मूरत आत्मा । शुभ भावों को मन में भरले, सहज मिले परमात्मा । दुष्टों का कर खात्मा, उतरे सिर से भार।…

मंजिल का एहसास | Prernadayak poem
मंजिल का एहसास ( Manzil ka ahsas ) यूं ही तो नही ये मेरे मेरे सपनों की उड़ान है, कुछ तो है मन के अंदर तो जुड़ा हुआ है इससे। कुछ तो है जो कर रहा है प्रेरित इस कदर से कि अब ये चुनोतियाँ बाधा नही बन सकती हैं।। क्या है…