उड़ान | Udaan

उड़ान पक्षी अपने गीत के बदले तोड़ लेता है धान की दो बालियाँ लौट जाता है आसमान के घने घोंसले में अनपहुँच अन्वेषा की आँखें क्षितिज के विराग को छूकर लौट आती हैं फिर से अपने अभीष्ट के अन्तिम आश्रय में डैने सन्तुलित करते हैं दूर से दूर खिसकती नीलिमा की उदार सान्द्रता और फिर … Continue reading उड़ान | Udaan