विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें | Vinay Sagar Jaiswal Poetry

मुक़द्दर फूट गया उनके आने का वादा जब टूट गयादिल बोला के आज मुक़द्दर फूट गया इस दर्जा मदहोश किया उन आँखों नेदिल की दौलत पल भर में ही लूट गया कैसे बोझ सहे इतने सदमों का दिलशीशे का बर्तन था आखिर टूट गया वक़्त की आँधी होश कहाँ रहने देतीकौन मुसाफ़िर कितना पीछे छूट … Continue reading विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें | Vinay Sagar Jaiswal Poetry