जख़्म के हर निशान से निकला

जख़्म के हर निशान से निकला जख़्म के हर निशान से निकलादर्द था वो अज़ान से निकला लोग जो भी छिपा रहे मुझसेबेजुबां की जुबान से निकला इश्क़ के हो गये करम मुझ परतीर जब वो कमान से निकला आँख भर ही गई सुनो मेरीआज जब वो दुकान से निकला आज सब कुछ लिवास से … Continue reading जख़्म के हर निशान से निकला