पापा तो पापा ही होते | Papa to Bus Papa hi Hote

पापा तो पापा ही होते

( Papa to bus papa hi hote ) 

 

यह पापा तो हम सब के पापा ही होते,
स्वयं से भी ज़्यादा हमारा ध्यान रखतें। ‌
हमें ज़िन्दगी जीने की यह कला बताते,
कभी कोई बहाना किसी से ना बनाते।।

सभी ज़रुरतों को यह पापा पूरी करतें,
नौकरी कोई ऑटो रिक्शा यह चलातें।
चाहें मेहनत मज़दूरी खेती बाड़ी करते,
जल्दी उठते और काम पर चलें जाते।।

पर्व त्योंहार पर नये-नये कपड़े दिलाते,
पढ़कर आगे बढ़नें को कहते ही रहते।
जज़्बात हम सभी के ये पापा समझते,
कभी अपने लिए वह कुछ न खरीदते।।

देखकर चेहरा बच्चें का फूले न समाते,
सजाकर सपने उनको पूरा वहीं करतें।
कोड़ी-कोड़ी जोड़कर यह शादी रचाते,
बेहतर करतें चाहें स्वयं वो बिक जाते‌।‌।

हारी बीमारी दुःख में लेकर यह भागते,
कभी बच्चों पे ऑंच कोई आनें न देते।
हमें सरल एवं सहज भाषा में समझाते,
कभी गुरु दोस्त माता जैसा प्यार देते।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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