अंधविश्वास | Andhvishwas

सुनीता को कई दिनों से सिर दर्द कर रहा था। एक दिन तो वह बेहोश हो गई। उसका पति शहर कमाने गया हुआ था। घर में उसकी सासू जेठ जेठानी आदि थे। उन्होंने सोचा कि इसको कोई भूत प्रेत का साया लग गया है इसलिए एक ओझा के पास गांव में ले गए। उसने भी कुछ झाड़-फूंक किया और उसे होश आ गया।

मूल रूप से सुनीता को कोई भूत प्रेत नहीं बल्कि ऑक्सीजन की कमी से उसे बेहोशी आई थी। क्योंकि वह जहां रह रहे थी उसमें किसी प्रकार की खिड़की नहीं थी और घर के एकदम पीछे साइड में बना हुआ था। जहां किसी भी प्रकार से हवा प्रवेश नहीं कर पा रहा था।

पति के घर पर ना रहने के कारण भी वह तनाव में रहा करती थी। तनावपूर्ण अवस्था में प्रायः व्यक्ति का आत्मविश्वास गिर जाता है। ऐसे में अपने आत्मविश्वास के अभाव में व्यक्ति अपने तनाव नियंत्रण के लिए ऐसी किसी बाह्य गतिविधियों को अपना लेता है जिसका मूलाधार अंधविश्वास होता है। ऐसे में व्यक्ति अंधविश्वासी व्यवहार द्वारा स्वयं को पहले से ज्यादा आत्मविश्वास युक्त महसूस करने लगता है।

इस प्रकार का व्यवहार भूत प्रेत से ग्रस्त स्त्रियों में ज्यादा देखा गया है । वह जब मजार, दरगाह आदि में जाती हैं या किसी वजह से तांत्रिक मौलवी आदि के द्वारा कुछ भभूत दे दिया जाता है तो यह अपने में हल्का पन महसूस करती हैं ।

यह हल्कापन मन में यह विचार करने से हुआ कि मुझे भूत पकड़ लिया मैं ठीक हो जाऊंगी। यह चिंतन उसे थोड़ी मानसिक शांति देता है लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है। यही नहीं बल्कि उचित समाधान ना करने से और बढ़ जाती है।

अंधविश्वासी परंपराओं में देखा गया है पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा ग्रस्त है । उनमें से शहरी की अपेक्षा ग्रामीण महिलाएं ज्यादा अंधविश्वासी होती हैं। इस अंधविश्वास की जड़ में अशिक्षा अज्ञानता ज्यादा कारण है।

जैसे-जैसे समाज में महिलाओं में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है अंधविश्वास थोड़ा कम हुआ है। जिस अंधविश्वासों को पूर्वज मानते आ रहे हैं उसे बच पाना मुश्किल है। महिलाओं में अंधविश्वास की प्रवृत्ति बच्चों को भी अंधविश्वासी बना देती है।

कोई बालक या बालिका विद्यालय में वैज्ञानिक तथ्यों का अध्ययन करके आता है परंतु समाज में फैले अंधविश्वास उसके वैज्ञानिक तथ्यों पर कालिख पोत देते हैं उसे या पढ़ाया जाता है कि सभी जीवो की अपनी अलग जाति होती है परंतु अंधविश्वासी परंपराओं में देखता है कि उसका उल्टा ही दिखाई पड़ता है। ऐसे में यदि वह ऐसी गलत परंपरा का विरोध करता है तो उसे समाज से अलग-थलग कर दिया जाता है।

सुनीता को उस समय तो कुछ राहत हो गई लेकिन ऐसा उसके साथ कई साल तक होता था। वह बेहोश होती और ओझाओं के भभूत,मजार ,दरगाह आदि जाने पर कुछ राहत महसूस होती। इसमें एक बात विशेष देखा गया कि जब उसका पति घर पर होता तो वह बहुत खुश होती और कभी बीमार नहीं होती थी।

इसका अर्थ है कि वाह अपने पति का प्रेम पाना चाहती थीं। ऐसा भी देखा गया है कि जिस स्त्री के पति अधिकांशतः बाहर नौकरी पर होते हैं। वही औरतें ज्यादा भूत प्रेत के चक्कर में परेशान रहती हैं। या फिर ऐसी महिलाएं जिनके बच्चे नहीं होते वह भी ज्यादा भूत प्रेत के चक्कर में परेशान रहती हैं।
देखा गया है कि महिलाएं बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति की होती हैं।

विभिन्न प्रकार के व्रत उपवास में जितना महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं उतना पुरुष नहीं । पिछले दो दशकों से धार्मिक चैनलों की बाढ़ आ गई है। इसी के साथ नित नए-नए बाबा भी उत्पन्न हो रहे हैं ।

धार्मिक सत्संग में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की भीड़ दिखती है। सत्संग से पूर्व यही महिलाएं कलश यात्रा आदि निकालती हैं। सत्संग के बीच में ढोलक की थाप पर खूब जम के डांस भी करती हैं।
यज्ञ मंडप को सजाने या कलश यात्रा को सिर पर धारण करने सभी तामझाम स्त्रियों को ही करने पड़ते हैं ।

साथ ही भव्य आरती वगैरा में भी महिलाएं ही आगे रहती हैं । महिलाओं का इस प्रकार से सत्संग में भागीदार उनकी श्रद्धा कम बाबाओं की चालाकी ज्यादा होती है । उन्हें मालूम होता है कि महिलाएं धर्मभीरु ज्यादा होती है ।

भगवान के नाम पर उनसे ज्यादा मुफ्त का काम कोई नहीं कर सकता । ऐसे में कई महिलाएं व्रत भी रखती हैं। एक तो पेट खाली होता है फिर भी कलश यात्रा दो-तीन किलोमीटर की होती है । ऊपर से कलस का वजन 5 किलो तक का होता है। आवश्यकता है धर्म के नाम पर स्त्रियों के साथ शोषण के इन नये नये तरीकों पर प्रतिबंध लगाने की।

सुनीता इसी बीच गर्भवती हुई और एक सुंदर बच्चे को जन्म दिया। इसी बीच उसका पति भी उसके साथ अधिक से अधिक समय तक रहने लगा। पति के साथ रहते हुए उसे कभी भूत प्रेत की बीमारी नहीं हुई। यदि कभी वह अपने पति से चर्चा भी करती तो उसका पति टाल देता ।

यह सब कुछ नहीं होता है। तुम्हारे मन में मात्र को बहम भरा हुआ है। पहले जो वह बहुत दुबली पतली हो गई थी उसका शरीर भी अच्छा हो गया था। इसी बीच वह पुनः गर्भवती हुई और एक बच्ची को उसने जन्म दिया। अब उसका पूरा समय उन बच्चों के सेवा में लगने लगा । फिर वह भूल ही गई कि उसे किसी भूत-प्रेत की छाया लगी हुई है।

वास्तव में देखा गया है भूत प्रेत का नाटक कर स्त्रियां अपने ससुराल एवं पति का प्रेम पाना चाहती हैं। ऐसे में घर के लोगों को चाहिए कि जिस स्त्री को भूत प्रेत का नशा चढ़ा हो उसे किसी ओझा सोखा या मजार दरगाह पर ना ले जाकर उसे प्रेम पूर्ण वार्तालाप संवाद करें। उसे अधिक से अधिक पति के सानिध्य में रहने दे। धीरे-धीरे प्रेम पूर्ण वार्ताओं से भूत प्रेत का नशा उतर जाता है।

 

योगाचार्य धर्मचंद्र जी
नरई फूलपुर ( प्रयागराज )

यह भी पढ़ें:-

बंटवारा | Batwara

Similar Posts

  • दर्द ढोते हैं हम | Laghu Katha Dard

    घर की स्थिति ठीक नहीं थी तो रमेश का कौन नहीं मजाक उड़ाता था कि पढ़ – लिखकर आखिर क्या करेगा, वह। रमेश फिर भी उनकी बातों पर ध्यान दिए बिना आगे बढ़ने के लिए प्रयास करते रहा। ऐसे ही दिन में अपने-पराए पहचाने जाते हैं। उसकी नौकरी लगी और जब वह घर आता तो…

  • Зеркало Vavada для игроков без блокировок 2026

    Зеркало Vavada для игроков без блокировок 2026 Прямой путь к азартным развлечениям лежит через vavada casino официальный сайт, где пользователи могут избежать препятствий и сразу приступить к игре. Актуальные ссылки обеспечивают стабильный доступ и минимизируют риск возникновения проблем с входом на платформу. Однако, стоит учитывать, что доступные площадки обновляются. Следите за последними новостями и проверяйте,…

  • एक ही रास्ता

    “मम्मी जी, मैं बहुत दिनों से आपसे मन की बात कहना चाह रही थी।” पिंकी बोली। “क्या बात है बेटा? बताओ मुझे। मुझसे बताने को भी इतना सोचना पड़ रहा है।” पिंकी की मम्मी बोली। “मम्मी जी, आप पापा से कहो कि वह मेरे लिए इधर-उधर लड़का ना ढूंढे। मुझे एक लड़का पसंद है।” “कौन…

  • Пинко казино зеркало как пользоваться в 2026 году

    Пинко казино зеркало как пользоваться в 2026 году Для начала важно знать, что доступ к платформе можно получить через проверенное зеркало, что обеспечивает стабильность работы и защиту от блокировок. После получения ссылки на альтернативный адрес, перейдите по ней в своем браузере, чтобы открыть площадку. После загрузки сайта вам понадобится зарегистрироваться. Для этого зайдите в раздел…

  • समझदारी

    2005 की बात है। रामपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में मुकुल गुरु जी की पोस्टिंग हेड मास्टर के पद पर हुई। मुकुल बच्चों के प्रति बहुत संवेदनशील थे और बच्चों से विशेष लगाव व स्नेह रखते थे। मुकुल जी का व्यवहार बच्चों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण, समझदार और प्रेरक था। वे बच्चों की जरूरतों और समस्याओं…

  • निजता का हनन

    पति-पत्नी का रिश्ता बेहद खूबसूरत होता है… बशर्ते इसमें प्यार, रोमांस, विश्वास, समर्पण, निष्ठा, सहयोग, समर्थन, समझदारी, विश्वास, ईमानदारी, संवाद, समझौता, गोपनीयता, सहनशीलता जैसी महत्वपूर्ण बातों का.. भावों का होना बेहद जरूरी है। कुछ ऐसा ही रिश्ता था मानव और दामिनी का। शादी को 4 साल हो गए थे। सब कुछ बेहतरीन चल रहा था।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *