चंदा मामा दूर के | Chanda mama door ke

देखो ना मां,आज मैं मामा से पहली बार मिला हूं,और जैसा तुमने कहा था मामा तो बिलकुल वैसे ही है, प्यारे प्यारे। जैसे ही मैं उनसे मिलने पहुंचा बाहें फैलाकर उन्होंने मुझे गले लगा लिया।

मां अब चंदा मामा दूर के नहीं रहे।मामा बता रहे थे कि अब वो हमारे साथ ही रहेंगे।इसका मतलब मां अब मैं जब चाहूं मामा से मिल सकता ना।

स्कूल में जब भी मैं कहता था कि मेरे मामा तो चंदा मामा है तो सब हंसते थे कि ये पागल है,इसके नाना घर ना है कोई तो चंदा मामा को ही मामा बोल रहा।

और ये सुनकर मैं उदास हो जाया करता था। लेकिन मुझे पता था मेरी मां मुझसे झूठ नहीं बोलेगी और एकदिन मैं भी अपने मामा से मिलने त्यौहार पर ही जाऊंगा।

और देखो मां मैं आ गया मामा से मिलने त्यौहार से पहले ही।अब मैं मामा के साथ हर त्यौहार मनाऊंगा। मां तुमने सच ही कहा था चंदा ही मेरे मामा है। और अब हम सदा साथ रहेंगे।

 

रचनाकार : आर.वी.टीना
बीकानेर ( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

चंदामामा | बाल मनुहार | पत्र


Posted

in

by

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *