आख़िर क्यों?

आख़िर क्यों? क्यों हर राह तुझ तक जाती नहीं,क्यों तेरी झलक नज़र आती नहीं?हर रोज़ तुझे देखने की कोशिश की,फिर भी क्यों मेरी दुआ असर लाती नहीं? ना कोई शिकवा, ना कोई गिला है,तेरे बिना हर लम्हा मुझे अधूरा मिला है।मैंने तो बस तुझसे प्यार किया,फिर क्यों मुझे ये फ़ासला मिला? कभी ख्वाबों में, तो … Continue reading आख़िर क्यों?