अद्भुत है फागुन मधुमक्खियाँकितनी व्यस्त हैं इन दिनोंउन्हें ठहरने कीबात करने कीभी फ़ुर्सत नहीं हैउन्हें तो लाना है परागउन्हें आकर्षित करते हैंमहकते हुए बागवह कर रही हैंअपना काम निस्वार्थ भाव सेहँसी ख़ुशी से चाव-चाव सेमहुए के फूलों की मादकताअंकुरित आम मंजरियों की कोमलतापलाश की आभागेहूँ की गंधअलसी के फूलों का रंग टेसू की महकसरसों के … Continue reading अद्भुत है फागुन
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