अमर दुनिया की हरवस्तु जन्म लेती हैऔर मरती हैइस मरणधर्माजगत में अमर कीकल्पना करने वालाकोई महान हीकल्पनाकार होगाकर्मों के सही सेक्षयोपशम होने परमनुष्य भव मेंसही से कर्मों काक्षयकर संपूर्णज्ञान प्राप्त होनेपर मिलन जबआत्मा से स्वयं काहोता तो आत्माके शुद्ध रूप सेफिर कोई भेदभेद न रहताज़िंदगी का सफ़रआयुष्य जितनाकेवली का होताधर्म का हीउस अवस्था मेंपहुँचने का … Continue reading अमर
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